Anokha Love Story: एक 14 साल के संजू की सच्ची कहानी, जिसके पीछे था एक अनजान साया (Part - 1)
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यह कहानी साल 2008 की है। जब हम छोटे होते हैं, तो दुनिया बहुत खूबसूरत लगती है, लेकिन कभी-कभी वक्त हमें बचपन में ही बड़ा बना देता है। आज मैं आपके साथ अपने जीवन की एक ऐसी ही सच्ची दास्तान साझा करने जा रहा हूँ, जिसे मैंने खुद जिया है। इस कहानी में कुछ छुपाने जैसी बात नहीं है, क्योंकि यह मेरी अपनी ज़िंदगी का सच है। आइए जानते हैं उस वक्त क्या हुआ था।
गाँव का वो लड़का और घर के हालात.साल 2008 में गाँव का एक लड़का, जिसका नाम संजू था, उसने महज 14 साल की उम्र में अपनी 10वीं की परीक्षा दी थी। परीक्षा खत्म होने के बाद, घर की आर्थिक स्थिति को देखकर संजू का मन विचलित रहने लगा। उसने सोचा कि क्यों न घर की मदद करने के लिए थोड़ा पैसा कमाया जाए। कुछ ही दिनों के बाद, गाँव के ही कुछ लड़के काम की तलाश में बाहर के राज्यों (जैसे तमिलनाडु) जाने की तैयारी कर रहे थे।
जब संजू ने उन लड़कों को देखा, तो उसने मन ही मन फैसला कर लिया कि वह भी उनके साथ बाहर काम करने जाएगा। संजू ने एक बूढ़े व्यक्ति से इस बारे में बात की और कहा, "बाबा, मैं भी बाहर काम पर जाना चाहता हूँ।" बूढ़े आदमी ने संजू को देखा और उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा, "गाँव के हालात ठीक नहीं हैं। तू बाहर जाएगा, कुछ पैसे कमाएगा, तो तेरे घर की परेशानी थोड़ी कम हो जाएगी।"
जब माँ को पता चला सच. बूढ़े व्यक्ति की बात सुनकर संजू सीधा अपने घर आया। घर में आते ही उसने अपनी माँ से कहा, "माँ, मैं बाहर (दूसरे राज्य) काम करने जाना चाहता हूँ। यहाँ रहकर मैं क्या करूँगा? जैसे ही मेरा 10वीं का रिजल्ट आएगा, मैं वापस आ जाऊँगा और आगे की पढ़ाई जारी रखूँगा।"
यह सुनते ही माँ की आँखों में आँसू आ गए। माँ ने रोते हुए कहा, "बेटा, तू अभी बहुत छोटा है। इतनी छोटी उम्र में तेरा बाहर जाना ठीक नहीं है।" लेकिन संजू अपनी बात पर अड़ा हुआ था। उसे सिर्फ अपने घर की स्थिति को बदलना था। संजू अपनी माँ से बहुत प्यार करता था, और माँ भी अपने इस छोटे से बच्चे को अपनी आँखों से दूर नहीं करना चाहती थी।
पिता का फैसला और संजू की खुशी. संजू की ज़िद और घर के हालातों को देखकर माँ का दिल पसीज गया। माँ ने संजू के सिर पर हाथ फेरा और ढांढस बंधाते हुए कहा, "ठीक है बेटा, तू अपने बारे में कितना सोचता है। जब तुम्हारे पापा काम से घर लौटेंगे, तो मैं उनसे इस बारे में बात करूँगी।"
शाम को जब पापा घर आए, तो माँ ने उनसे बात की और संजू की ज़िद के बारे में बताया। आखिरकार, पापा ने भी संजू को बाहर भेजने की अनुमति दे दी। पापा के मुँह से हाँ सुनते ही संजू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह बहुत खुश था कि अब वह अपने परिवार की मदद कर पाएगा। लेकिन उस वक्त मासूम संजू को यह अंदाज़ा नहीं था कि आने वाले कुछ ही दिनों में उसकी यह खुशी किस मोड़ पर जाने वाली है... (Part - 1 समाप्त)

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